Latest Garibi Shayari in Hindi (ग़रीबी शायरी हिंदी में)

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ग़रीबी में जीना सीख लिया है,
इतना सब्र अब आ गया है,
दर्द भी देखकर हँस देते हैं,
मजबूरी का नाम ‘आदत’ पड़ गया है।

खाली जेब, ख्वाब भारी,
गरीबी की है ये कहानी सारी।
हर कदम पर ठोकर खाये,
फिर भी हौसला ना हार जाये।

रोटी के लिए तरसता मन,
चांद को देखे भूखा तन।
गरीबी वो आग है यारा,
जो जलाए बिना धुआं धारा।

जिसे लोग गरीब समझते हैं,
वो दिल से अक्सर बहुत अमीर होता है।

दो वक्त की रोटी नसीब नहीं,
ख्वाबों का महल कभी रकीब नहीं।
गरीब का दिल अमीर सा बोले,
हंसी से हर गम को तोले।

गरीबी कोई अपराध नहीं,
मगर इस समाज में यह सबसे बड़ा अपराध समझा जाता है।

खाली पेट, आंखें नम,
गरीबी है जिंदगी का सन्नाटम।
फिर भी मुस्कान चेहरे पे सजे,
हर दर्द को हौसले से सहे।

Garibi Shayari in Hindi

चांदनी रात में तारे गिनता,
गरीब का दिल ख्वाब बुनता।
जेब खाली, मगर इरादे बड़े,
वो हर मुश्किल से लड़ता रहे।

ग़रीबी की मार झेलते-झेलते,
आँखों ने सुख के सपने छोड़ दिए,
अब तो बस इतनी सी दुआ है,
जिनके पास है, वो संभलकर रहें।

ग़रीब की आवाज़ कोई नहीं सुनता,
अमीर की चुप्पी भी सुर्खियाँ बन जाती है,
ये दुनिया है, यहाँ इंसान नहीं,
दौलत की कीमत देखी जाती है।

ग़रीबी में भी खुश रहना सीखा,
मगर लोग हमें ‘बेइज्ज़त’ समझते हैं,
पैसे वाले की गलती ‘भूल’ बन जाती है,
हमारी मजबूरी ‘आदत’ बन जाती है।

दिन भर मेहनत करके भी,
दो वक्त की रोटी नसीब नहीं होती,
ग़रीबी ये नहीं कि पैसे नहीं,
ग़रीबी तो ये है कि इज्ज़त नहीं होती।

जहाँ पैसा बोलता है, वहाँ गरीब की आवाज़ कौन सुनता है?

गरीबी ने सिखाया हमें मुस्कराना,
वरना आँसू तो बचपन में ही सूख चुके थे।

एक गरीब बाप अपनी बेटी की शादी
करने के लिए उम्र भर की पूंजी जोड़ता है।

2 Line Garibi Shayari

2 Line Garibi Shayari

अक्सर अमीर का दिखावा और गरीब का दर्द
लोगों को नज़र नहीं आता।

जिसे दो वक़्त की रोटी भी नसीब नहीं,
वो अमीरों से ज़्यादा अल्लाह का शुक्र अदा करता है।

फिर भी किसी का हक नहीं मारा,
ग़रीबी में भी इंसानियत निभाई,
यही तो असली जीत है हमारी।

हम वो नहीं जो दिखावे में जिएँ,
हम वो हैं जो ग़रीबी में भी खुश रहते हैं,
पैसे वालों की दुनिया अलग हो सकती है,
पर हम दिल से अमीर हैं।

ग़रीबी में भी हौसला नहीं टूटा,
मगर लोगों ने हमें तोड़ने की कोशिश की,
हम वो नहीं जो हार मान लें,
बस जिंदगी ने थोड़ा और लड़ना सिखा दिया।

ग़रीबी सिखाती है संघर्ष का मतलब,
रिश्तों की असली पहचान बताती है,
जब पैसे वाले साथ छोड़ जाते हैं,
तब पता चलता है कौन अपना है।

Shayari on Garibi

Shayari on Garibi

“ग़रीबी में भी इंसानियत निभाई,
किसी का दिल नहीं दुखाया,
मगर दुनिया वालों ने हमें ही,
ग़रीबी का ‘तमाशा’ बना दिया।

गरीबी चुभती है तब और ज़्यादा,
जब इलाज़ पैसे से और मौत मुफ़्त में मिलती है।

वो जो रोज़ sidewalk पर सोता है,
उसके भी सीने में एक सपना पलता है।

पैसे की तंगी नहीं, सोच की गरीबी सबसे बड़ी होती है,
वरना इंसान सब कुछ पा सकता है।

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बचपन भी झोपड़ी में जल्दी बड़ा हो जाता है,
जब स्कूल की जगह हाथ में औज़ार होता है।

गरीब माँ की ममता भी अमीर होती है,
बस वो खिलौने की जगह रोटी से खेला देती है।

जिनके घर चूल्हा जलता है मेहनत से,
वो कभी किसी का हक़ नहीं छीनते।

अमीरी में हर दिन त्यौहार लगता है,
गरीबी में त्यौहार भी कर्ज़दार लगता है।

सपने सबके होते हैं, हक़ भी सबका होता है,
मगर गरीब का सपना अक्सर सिर्फ़ सपना रह जाता है।

कभी फटे कपड़ों में भी इज़्ज़त देखी है,
ये दौलतवाले क्या जानें मेहनत की रोटी की मिठास।

पेट खाली हो तो दिल कहाँ सुकून पाता है,
गरीब का हर सपना भी भूख से लड़ जाता है।

गरीब की ज़िंदगी में ख़ुशियाँ भी उधार की होती हैं,
कभी दूसरों की मुस्कान में, तो कभी सपनों की दीवार में।

गरीबी ने सिखाया सबक यही,
खुद की मेहनत है दोस्त सही।
हाथ फैलाने से बेहतर है,
खुद का रास्ता बनाना सही

Top Garibi Shayari in Hindi

Garibi Shayari in Hindi

छत टूटी, दीवारें कांपे,
गरीबी के आंसू ना थमे।
मगर दिल में है उम्मीद की लौ,
जो मिटाएगी हर गम का नक्शा नौ।

जेब में सिक्कों की खनक नहीं,
दिल में खुशी की चमक नहीं।
फिर भी गरीब वो गीत गाए,
जो जिंदगी को रंगीन बनाए।

गरीबी की चादर ओढ़े वो,
ख्वाबों को सीने से जोड़े वो।
हर रात मुश्किल, हर दिन नया,
फिर भी हार न माने वो परछाईं सदा।

ग़रीबी की मजबूरी को समझो,
हर कोई खुशहाल जीवन जीना चाहता है,
मगर किस्मत कुछ और ही लिख देती है,
और इंसान मजबूर हो जाता है।

जब ग़रीबी ने दरवाज़ा खटखटाया,
तो दोस्तों ने दरवाज़े बंद कर लिए,
अब हम अकेले ही लड़ते हैं,
मगर हार नहीं मानते।

ग़रीबी में भी हमने कभी,
किसी का सहारा नहीं छीना,
मगर जब हम मुसीबत में थे,
तो सबने हमें अकेला छोड़ दिया।

ग़रीब का बच्चा बड़ा होकर,
डॉक्टर-इंजीनियर बन जाए,
मगर समाज उसे हमेशा,
‘ग़रीब का बेटा’ ही कहता है।

Best Shayari on Garibi

Shayari on Garibi

भूख की आग में जलता तन,
गरीबी का है ये सच्चा मन।
मेहनत की राह पर चलता जाए,
खुद की तकदीर खुद बनाए।

खाली थाली, अधूरी रात,
गरीबी की है ये सौगात।
मगर हौसला है आसमान सा,
जो छू लेगा हर ख्वाब का आसमां सा।

गरीबी वो बोझ जो कंधे चढ़े,
हर कदम पर इम्तिहान सजे।
मगर उसकी आंखों में चमक बाकी,
जो लिख देगी नई तकदीर की साखी।

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