30+ Gussa Shayari In Hindi
ग़ुस्सा इश्क़ का वो रंग है जो हर रिश्ते को कड़वा भी बनाता है और गहरा भी। अगर आप किसी की नाराज़गी, टूटे जज़्बात या अपने दिल की आवाज़ शायरी में ढूंढ रहे हैं, तो ये Gussa Shayari In Hindi आपके लिए है।
यहां आपको नाराज़ महबूब के लिए शायरी, रिश्तों में रूठने-मनाने के पल और दर्द भरे लफ़्ज़ मिलेंगे जो दिल को छू जाएँगे।
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Gussa Shayari In Hindi

तेरा ग़ुस्सा भी अब आदत सा हो गया है,
न तुम बदलते हो, न हम छोड़ पाते हैं।
ग़ुस्से में कहा हर लफ़्ज़ दिल की बात नहीं होती,
कभी-कभी चुप रह जाना ही मोहब्बत की सबसे बड़ी पहचान होती है।
नाराज़ तो बहुत हैं तुमसे,
पर छोड़ देने का हौंसला अब भी नहीं है।
तू ग़ुस्से में था तो खामोश रहना बेहतर समझा,
वरना हर जवाब तुझसे रिश्ता तोड़ देता।
कभी खुद से भी ग़ुस्सा आता है,
जब तुझे मनाने के लिए खुद को गिरते देखता हूँ।
तेरे तानों ने ग़ुस्से को आग दे दी,
वरना हम तो खामोशी से जल रहे थे पहले ही।
ग़ुस्से में जो तुमने कहा, वो याद नहीं,
पर जो तुमने महसूस नहीं किया, वो आज भी दिल में चुभता है।
हमने तो हर बात पे चुप्पी साध ली,
अब ग़ुस्से में भी तुम्हें अपना लगे तो बताना।
रूठा हूँ तो वज़ह भी गहरी होगी,
हर बात पे नाराज़ होने वाला नहीं हूँ मैं।
ग़ुस्सा तेरा हक़ है, पर मेरी ख़ामोशी को कमजोरी न समझना,
जो दिल तोड़ सकता है, वो दिल जोड़ने का हुनर भी रखता है।
Gussa Shayari Status

तेरा हर झूठ अब सच सा लगने लगा है,
तेरा ग़ुस्सा भी अब दर्द सा लगने लगा है।
कभी सोच लेना अकेले में बैठकर,
किसे खो दिया तुमने बहस की आग में जलकर।
तू ग़ुस्से में था, हम मोहब्बत में,
तेरी बातों में आग थी, हमारी खामोशी में नम।
हम तो आज भी वहीं खड़े हैं तेरे इंतज़ार में,
जहां तुमने छोड़ा था हमें बिना किसी वजह के सनम।
हर रोज़ मनाना आसान नहीं होता,
खुद को हर बार तोड़ना आसान नहीं होता।
तू भी कभी समझ ले मेरी चुप्पियों को,
ग़ुस्से के पीछे भी प्यार छिपा होता।
नाराज़ हो तो बता दो हमें,
इतना मत सता कि टूट जाएं हम।
हर बार हम ही क्यों झुकें,
क्या तुम्हारे दिल में नहीं हैं हम?
तू जब ग़ुस्से में होता है, तो लफ्ज़ चुभते हैं,
तेरी बातों के तीर सीने में धंसते हैं।
फिर भी तुझसे शिकायत नहीं होती,
क्योंकि तेरे ग़ुस्से में भी मोहब्बत दिखती है।
तेरे ग़ुस्से में जो बात थी, वो बात नहीं रही,
अब वो रिश्ता भी पहले सी सौगात नहीं रही।
तू बदल गया या मैं, ये सवाल बाकी है,
पर अब उस प्यार में वो बात नहीं रही।
मेरे सब्र की इन्तहां मत ले,
हर बार की तरह माफ़ नहीं करूंगा।
ग़ुस्सा तेरा सर आंखों पर,
पर अब चुप रहना नहीं सीखूंगा।
रूठ कर चला गया तू जब,
हमने खुद से भी रिश्ता तोड़ लिया।
तेरे ग़ुस्से ने जो असर किया,
हमने हँसना तक छोड़ दिया।
तेरे ग़ुस्से से डर नहीं लगता मुझे,
तेरी खामोशी से डर लगता है।
क्योंकि तू कुछ कहे न कहे,
तेरी चुप्पी बहुत कुछ कह जाती है।
हर बार हम ही झुकते रहें,
क्या यही प्यार की रीत है?
तू ग़ुस्सा भी करे और रूठे भी,
कभी हमारे हिस्से में भी मोहब्बत की जीत है?
Gussa Shayari In Hindi For Girl

तेरा ग़ुस्सा देखा, तो खामोश रह गए,
दिल के जज़्बात आँखों में रह गए।
तू समझा ही नहीं हमारी मोहब्बत को,
हम हर बार तेरी बातों में रह गए।
बहुत कोशिश की तुझे समझाने की,
हर मोड़ पर तेरे साथ निभाने की।
पर तू हर बार ग़ुस्से में बह गया,
हमेशा इश्क़ की कसम खाने की।
तेरी हर नाराज़गी हमें चुप करा देती है,
हमारी हर माफ़ी तुझसे और जोड़ देती है।
ग़ुस्से में भी अगर इतना असर है तुझमें,
तो सोच मोहब्बत में क्या होगा तुझमें।
रिश्ते ग़ुस्से से नहीं, सब्र से चलते हैं,
हर बात पर लड़ना मोहब्बत नहीं होती।
अगर चाहत सच्ची हो दिल से,
तो नाराज़गी भी इबादत होती।
ग़ुस्से में तू बहुत कुछ कह गया,
पर मैं हर बात को सह गया।
तेरा हर लफ्ज़ सीने में चुभा,
मगर फिर भी तुझसे रिश्ता न बह गया।
मैं हर बार तेरे ग़ुस्से को मुस्कान से मिटाता रहा,
तेरे हर ताने को दिल से लगाता रहा।
कभी तो सोच मेरी खामोशी के पीछे,
कितना कुछ मैं खुद से छिपाता रहा।
जब तुम ग़ुस्सा करते हो,
तो लगता है अब सब कुछ टूट जाएगा।
मगर फिर तेरी एक मुस्कान,
दिल को फिर से जोड़ जाती है।
तेरी नाराज़गी भी अब जानी-पहचानी सी लगती है,
हर बार दिल में तूफ़ान लाती है।
फिर भी तुझसे दूर जाने की हिम्मत नहीं होती,
तेरे ग़ुस्से में भी मोहब्बत की बात लगती है।
कभी हमारी भी सुन लिया करो,
हर बार ग़ुस्से में मत भड़क जाया करो।
हम भी इंसान हैं, पत्थर नहीं,
थोड़ा प्यार से भी समझाया करो।
ग़ुस्से की भी एक हद होती है,
हर बार चोट खाकर भी चुप रहूं, ये ज़रूरी नहीं।
तू मोहब्बत समझता है बस अपने तरीके से,
कभी हमारी भी चाहत समझ, ये ज़रूरी है।
Gussa Shayari In Urdu

तू हर बात पर ग़ुस्सा कर जाता है,
और मैं हर बार चुप रह जाता हूँ।
शायद इसी को इश्क़ कहते हैं,
जहाँ एक टूटता है और दूसरा निभाता है।
तेरी नाराज़गी भी अब सज़ा सी लगती है,
हमारी मोहब्बत तेरे ग़ुस्से में दब सी लगती है।
तू बस खुद को सही मान बैठा है,
वरना मेरी भी खामोशी बहुत कुछ कहती है।
हमसे ग़ुस्सा तो कर लिया,
पर कभी वजह भी पूछ ली होती।
हमने तो हर बार तुझे ही चुना,
काश तूने भी एक बार सोच लिया होता।
अब तू जो चाहे कह ले हमसे,
हमने अब बुरा मानना छोड़ दिया है।
तेरे ग़ुस्से को भी अपना मान लिया हमने,
क्योंकि तुझसे रिश्ता तोड़ना नहीं आता हमें।
कभी तू हमारी जगह आ कर देख,
हर बार माफ़ करना कितना मुश्किल होता है।
ग़ुस्सा तुझसे नहीं, तेरी बेपरवाही से है,
जो हर बार दिल को तोड़ने चली आती है।
तू जो चुप हो गया ग़ुस्से में,
तो हमने भी अब बोलना छोड़ दिया।
रूठना-मनाना तो चलता रहता है,
पर इस बार हमने उम्मीदें छोड़ दिया।
तेरा ग़ुस्सा मुझे डराता नहीं है,
मगर ये सोच तड़पाती है,
कि कहीं इस ग़ुस्से में तू
मुझे हमेशा के लिए खो न दे।
हम हर बार तुझे मनाते रहे,
तेरे ग़ुस्से में भी मुस्कुराते रहे।
तूने कभी हमारी परवाह न की,
और हम हर लम्हा तुझसे जुड़े रह गए।
हर बात पे चिल्लाना मोहब्बत नहीं होती,
हर गलती पे छोड़ देना राहत नहीं होती।
ग़ुस्से के पीछे भी देख कभी,
शायद वहाँ भी मोहब्बत छुपी होती।
तेरा ग़ुस्सा हम सह गए,
तेरी बेरुख़ी भी सह गए।
पर अब अगर तू गया तो याद रखना,
हम तुझे वापस कभी नहीं कह गए।
Gussa Shayari In English

तेरा ग़ुस्सा भी अब अपनी किस्मत लगती है,
हर बात पे रूठ जाना तेरी आदत लगती है।
मगर फिर भी तुझसे शिकायत नहीं करते हम,
क्योंकि तेरी हर अदा हमें इबादत लगती है।
हमारी भी एक हद होती है,
हर बार तुम ही सही नहीं होते।
मोहब्बत की कद्र करना सीखो,
वरना दिल अपने आप पीछे हट जाते हैं।
हर बार ग़ुस्से में छोड़ जाते हो,
कभी पीछे मुड़ के देखा भी है क्या?
हम अब भी वहीं खड़े हैं इंतज़ार में,
जहाँ तुमने कहा था “बस अभी आया।”
तेरा ग़ुस्सा तुझ पर खूब जंचता है,
पर हर बार वही चोट हमें क्यों सहनी होती है?
कभी खुद से भी सवाल किया है?
कि हर झगड़े में गलती सिर्फ हमारी ही क्यों होती है?
तेरी चुप्पी अब डराने लगी है,
तेरा ग़ुस्सा अब सताने लगा है।
मोहब्बत तो आज भी है तुमसे,
पर अब खुद से नज़रें मिलाना मुश्किल लगने लगा है।
तू हमेशा नाराज़ रहा,
हमेशा ग़ुस्से में रहा।
कभी ये भी तो पूछता,
हम कैसे रहे, जब तू खुद में ही रहा?
कभी हमारा हाल भी जान ले,
हर बार तेरी ही कहानी क्यों हो?
ग़ुस्से से बाहर निकल के देख,
इस दिल में मोहब्बत अब भी बाकी क्यों हो?
रूठना तेरी फितरत बन गई है,
हर बात पर तल्ख़ बातें कहनी आदत बन गई है।
कभी बैठ के सुकून से सोचना,
कहीं हम सच में बुरे तो नहीं बन गए क्या?
तेरे ग़ुस्से ने हर दफा तोड़ा है हमें,
फिर भी हमने तुझसे नाता नहीं तोड़ा।
क्योंकि मोहब्बत की ये रस्म सीखी है हमने,
कि जो दिल में हो, उसे कभी छोड़ा नहीं जाता।
अब खामोशी को आदत बना लिया है,
तेरे ग़ुस्से को इबादत बना लिया है।
तू कुछ भी कह ले, चुप रहते हैं अब,
क्योंकि हमने मोहब्बत को इज्ज़त बना लिया है।
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FInal Thoughts
उम्मीद है आपको ये Gussa Shayari In Hindi पसंद आई होगी और आपने इन शायरियों में अपने जज़्बात जरूर महसूस किए होंगे। रिश्तों में कभी-कभी ग़ुस्सा भी प्यार की एक कशिश होती है।
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